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श्लेष अलंकार क्या होता है ? पूरी जानकारी | shlesh alankaar hindi notes

श्लेष अलंकार

 

 

श्लेष अलंकार – श्लेष शब्द का अर्थ है चिपका हुआ। जब एक शब्द में कई अर्थ चिपके हुए होते हैं , तब श्लेष अलंकार माना जाता है। किसी काव्य पंक्ति में जब एक शब्द का एक बार ही प्रयोग होता है , किंतु उसके कई अर्थ प्रकट होते हैं , तब श्लेष अलंकार होता है।

 

श्लेष अलंकार उदाहरण  –

” मंगन को देख पट देत बार – बार है। “

इस काव्य पंक्ति में ‘ पट ‘ शब्द का केवल एक बार प्रयोग हुआ है , किंतु इसके दो अर्थ सूचित हो रहे हैं १  कपाट , २ वस्त्र।  अतः पट शब्द के प्रयोग में श्लेष अलंकार है।

श्लेष अलंकार के दो भेद हैं १ अभंग पद श्लेष , २ सभंग पद श्लेष। 

 जब शब्द को बिना तोड़े मरोड़े उससे एक से अधिक अर्थ प्राप्त हो तब अभंग पद शैलेश होता है जैसे –

 

” जो रहिम गति दीप की , कुल कपूत की सोय।

बारे उजियारे करे , बढ़े अंधेरो होय। । “

 

यहां ‘ दीपक ‘ और ‘ कुपुत्र ‘ का वर्णन है। ‘ बारे ‘ और ‘ बढे ‘ शब्द दो – दो अर्थ दे रहे हैं। दीपक बारे (जलाने) पर और कुपुत्र बारे (बाल्यकाल) में उजाला करता है। ऐसे ही दीपक बढे ( बुझ जाने पर ) और कुपुत्र बढे ( बड़े होने पर ) अंधेरा करता है। इस दोहे में ‘ बारे ‘ और ‘ बढे ‘ शब्द बिना तोड़-मरोड़ ही दो – दो अर्थों की प्रतीति करा रहा है। अतः अभंगपद श्लेष अलंकार है।

जब किसी शब्द को तोड़कर उससे दो या दो से अधिक अर्थों की प्रकृति होती है वहां सभंग पद श्लेष होता है। जैसे –

 

” रो-रोकर सिसक – सिसक कर कहता मैं करुण कहानी।

तुम सुमन नोचते , सुनते , करते , जानी अनजानी। । “

 

यहां ‘ सुमन ‘ शब्द का एक अर्थ है ‘ फूल ‘ और दूसरा अर्थ है ‘ सुंदर मन ‘ | ‘ सुमन ‘ का खंडन सु + मन  करने पर ‘ सुंदर + मन ‘ अर्थ होने के कारण सभंग पद श्लेष अलंकार है।

 

 

श्लेष अलंकार के अन्य उदाहरण –

  • रहिमन पानी राखिये  , बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरे , मोती मानुष , चून। ।

( पानी के अर्थ है – चमक , इज्जत , पानी (जल) )

  • सुबरन को ढूंढत फिरत कवि , व्यभिचारी चोर।

( सुबरन = सुंदर वर्ण ,  सुंदर रंग वाली , सोना )

  • विपुल घन अनेकों रत्न हो साथ लाए।

प्रियतम बतला दो लाल मेरा कहां है। ।

( ‘ लाल ‘ शब्द के दो अर्थ हैं – पुत्र , मणि )

  • मधुबन की छाती को देखो ,

सूखी कितनी इसकी कलियां। ।

( कलियां १ खिलने से पूर्व फूल की दशा। २ योवन पूर्व की अवस्था )

 

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अंतिम महत्त्वपूर्ण शब्द

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