SEO in hindi

SEO क्या है ? क्यों आवश्यक है SEO in hindi full information

Seo क्या है और उसे कैसे किया जाता है | पूरी जानकारी इस पोस्ट में आपको दी जा रही है | इस पोस्ट को पूरा पढ़ें ताकि आपको seo से संबंधत सभी विषयों की पूरी जानकारी प्राप्त हो सके |

SEO क्या है ? क्यों आवश्यक है

 

नमस्कार दोस्तों आज जहां नौकरियों के अभाव में लोगों ने ऑनलाइन से कमाई का रास्ता चुना है , उसमें अधिक से अधिक सफलता पाना सभी चाहते हैं। चाहे वह वीडियो, फोटो, व्यंजन, ब्लॉगिंग, आदि कोई भी माध्यम हो। सभी जगह कंपटीशन प्रतिस्पर्धा निरंतर बढ़ता जा रहा है। आज किसी एक विषय को आप सर्च इंजन के माध्यम से ढूंढने का प्रयत्न करेंगे तो , आपको गूगल सर्च इंजन पर हजारों – हजार उससे संबंधित पोस्ट देखने को मिल जाएंगे।

ऐसे में आप अपने पोस्ट को ऊपर करने के लिए गूगल द्वारा तय किए गए मानदंडों को अपनाकर आप अपने पोस्ट/लेख  को रैंक करा सकते हैं। वह माध्यम है SEO ( SEARCH ENGINE OPTIMIZATION )

 

सर्च इंजन क्या होता है ? WHAT IS SEARCH ENGINE 

सर्च इंजन वह माध्यम है , जिससे किसी भी व्यक्ति को उसके ढूंढे गए शब्दों को ढूंढता है और उससे जुडी अन्य पोस्ट को भी दिखता है। सर्च इंजन कई प्रकार के होते है – गूगल सर्च इंजन , याहू सर्च इंजन ,बिंग सर्च इंजन आदि।

 

डोमेन नेम क्या है ? SEO में इसका प्रयोग क्या है ? (DOMAIN NAME)

SEO मैं सबसे अधिक महत्वपूर्ण डोमेन नेम है (DOMAIN NAME) ( वेबसाइट का नाम ) . आपका डोमेन नेम ही आपके पोस्ट के लिंक को वैल्यू / महत्व देने का कार्य करता है। आपका डोमेन नेम आपके पोस्ट कंटेंट से मैच करता हो, तो आपके पोस्ट की वैल्यू अन्य प्रतिस्पर्धी पोस्ट से अधिक रहेगी। तो सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने डोमेन नेम से जुड़े पोस्ट लिखें जैसे –

  • आपका डोमेन नेम किसी व्यंजन रेसिपी से संबंधित हो तो उस वेबसाइट पर टेक्नोलॉजी , वस्त्र – परिधान अथवा अन्य प्रकार के पोस्ट ना डालें , क्योंकि आपका डोमेन नेम ही यह निर्धारित करता है कि यह पोस्ट किस कैटेगरी का है।
  • आप ऑनलाइन कार्य इसलिए करते है क्योकि आपको आपके मेहनत के पैसे मिलते रहे ऐसे में आपका सभी कदम ठीक से रखे हो।
  • पहला चरण वेबसाइट का नाम ही चयन करना है। ताकी गूगल आपके पोस्ट को अधिक व्यक्ति तक पहुँचए जिससे आपको अधिक मूल्य मिल सके।

 

SEO क्या है ?

SEO का मतलब है सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन अर्थात आपका किसी भी प्रकार का ब्लॉग किसी भी सर्च इंजन में शामिल होना और उसको निश्चित रूप से दर्शकों तक बड़े स्तर में पहुंचाना। गूगल अथवा अनेक सर्च इंजन वर्तमान में  बढ़ती प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखकर एक नया मानदंड तैयार किया है जिसके माध्यम से किसी भी पोस्ट को गूगल तभी प्राथमिकता देता है जब उसके द्वारा निर्धारित मानदंडों को कोई भी पोस्ट वीडियो फोटो आदि पूरा करते हो। SEO दो प्रकार के होते हैं – ON PAGE SEO अथवा OFF PAGE SEO

 

ON PAGE SEO क्या होता है ?

 

आपकी वेबसाइट पर आपके द्वारा किया गया सभी प्रकार का कार्य ऑन पेज SEO कहलाता है। जैसे टाइटल(TITLE) , यूआरएल (URL ) , कीवर्ड (KEY WORD ), फोकस कीवर्ड ( FOCUS KEY WORD ), कंटेंट ( सामग्री ) , इमेज ( PHOTO ) मेटा डिस्क्रिप्शन ( META DESCRIPTION ) परमालिंक (PERMALINK) आदि।

इन सभी के माध्यम से आपका पोस्ट सर्च इंजन में ऊपर आता है। यही गूगल द्वारा निर्धारित कुछ नए मानदंड है। यह मानदंड / पैमाना पूर्ण करना आपके मेहनत पर निर्धारित करता है। क्योंकि गूगल द्वारा तय किए गए यह सभी मानदंड पूरा करते ही गूगल आपको आपके पोस्ट को ऊपर सर्च में दिखाने पर बाध्य होता है।

 

१ कीवर्ड (KEYWORD )

किसी भी पोस्ट को लिखने से पूर्व आप कीवर्ड प्लानर ( KEY WORD PLANER ) तथा अन्य सॉफ्टवेयर के माध्यम से कीबोर्ड की खोज कीजिए। जिस कीवर्ड पर अधिक से अधिक सर्च हो और मूल्य ज्यादा हो प्रतिस्पर्धा थोड़ी कम हो ऐसे कीबोर्ड की खोज करके आप अपने पोस्ट लेखन का कार्य आरंभ कीजिए।

क्योंकि कीवर्ड की खोज सबसे महत्वपूर्ण होती है।  आप किसी ऐसे कीवर्ड पर लेख न लिखे जो कोई सर्च नहीं करता हो , तो आपकी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण है आप अपने कीवर्ड की खोज को आधार बनाकर ही पोस्ट लिखें तो ज्यादा बेहतर होगा। ताकि अधिक से अधिक लोग आपके उस पोस्ट को पढ़ें और आपको मुनाफा हो।

ऐसे पोस्ट जिसपर दर्शक ज्यादा आते हैं उस पोस्ट पर विज्ञापन की दर अधिक होती है , जिसके कारण लेखक को अधिक पैसा मिलने की संभावना रहती है।

 

२ टाइटल ( TITLE )

किसी भी पोस्ट का टाइटल उसके कंटेंट से संबंधित और आकर्षित होना चाहिए , जिसके कारण पहले ही नजर में कोई भी व्यक्ति उस पोस्ट को पढ़ने के लिए मजबूर हो जाए।

किसी भी पोस्ट के लिए टाइटल सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आकर्षक टाइटल सदैव पाठक को आकर्षित करता है , और उस पोस्ट को भले ही उस में कंटेंट लेख सामग्री अच्छी हो या बुरी किंतु पढ़ने के लिए जरूर आतुर होता है। तो आप अपने पोस्ट की शुरुआत करने से पूर्व एक टाइटल का चयन करें जो आकर्षित और सारगर्भित हो।

३ कंटेंट अथवा लेख सामग्री ( POST CONTENT )

सदैव ध्यान रखना चाहिए कि लेख सामग्री ऐसी हो जो पाठक के अनुरूप हो , जो पाठक की जरूरत की पूर्ति करता हो। ऐसे विषय पर लिखे गए लेख सदैव ही पढ़े जाते हैं , अन्यथा व्यर्थ व अनावश्यक लिखे गए लेख को कोई भी नहीं पढ़ता।  आप ऑनलाइन इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि आपको उससे कुछ मुनाफा हो सके और अधिक से अधिक लोग आपके पोस्ट को पढ़ सके।

इसके लिए  महत्वपूर्ण यह रहता है कि आप लेख सामग्री समाज/पाठक  को ध्यान में रखकर पाठकों के अनुरूप ही लिखें।

पोस्ट कंटेंट लिखते समय एक बात का ध्यान रखें की पोस्ट की लेंथ बड़ी हो | लेकिन उनमे वही सामग्री डालें जो जरुरत की हो वार्ना लोग आपकी वेबसाइट पर आकर वापस चले जाएंगे | और ये गूगल के नजर में ठीक नहीं होता | और वो इसे गिनता है जिसे वो Bounce rate का नाम देता है | Bounce rate जितना काम होगा आपके वेबसाइट के लिए उतना अच्छा है |

 

४ इमेज फोटो ( IMAGE )

गूगल के मानदंडों के अनुसार आपके लेख में फोटो की भी अहम भूमिका रहती है। किसी भी पोस्ट का seo  बढ़िया करने के लिए उसमें फोटो की आवश्यकता होती है।

अतः आप जितना कम के.बी ( kb ) का फोटो बनाकर आकर्षक तरीके से अपने पोस्ट में शामिल कर सकते हैं उतना ही बेहतर होगा। जिसको देखकर कोई भी पाठक गूगल फोटो द्वारा भी आपके पोस्ट पर पहुंच सकता है।

यह फोटो ऑनलाइन सेव हो जाता है , कोई भी पाठक इस फोटो के नाम से सर्च करेगा तो यह फोटो लाइब्रेरी में मिल जाएगा , वहां से फोटो के माध्यम से आपके पोस्ट में वह पाठक / विजिटर डायरेक्ट आपके पोस्ट पर आ सकता है।

गूगल मानदंडों को ध्यान में रखते हुए अपने पोस्ट में फोटो आवश्यक रूप से शामिल करें। यह आपके एस ई ओ ( SEO )को ठीक करने का एक स्त्रोत है।

 

५ यू.आर.एल ( URL )

किसी भी पोस्ट का पता यू.आर.एल. ही होता है। अतः किसी भी पोस्ट का यू.आर.एल ही यह निर्धारित करता है कि आपके पोस्ट पर विजिटर को कैसे भेजा जाए।

आपके यू.आर.एल में आपके पोस्ट का सार होना चाहिए। यूं कहे के कोई व्यक्ति गूगल पर आपके पोस्ट को सर्च करें तो उसे आसानी से मिल जाए।  इसके लिए अपने यू.आर.एल में पोस्ट से संबंधित कीवर्ड को शामिल किया जाना आवश्यक है।

अन्यथा लोगों को विश्वास नहीं होगा कि उन्होंने जो कीवर्ड सर्च किया है वह कीवर्ड आपके पोस्ट में है अथवा नहीं। आपकी यू.आर.एल में डेट परसेंटेज wp/admin/[email protected]&843%6% अथवा अन्य चीज नहीं होकर , उसमें पोस्ट से संबंधित https//latesttechnology जैसे कीवर्ड होना चाहिए।

५ फोकस कीवर्ड (FOCUS KEY WORD )

फोकस कीवर्ड वह शब्द होता है जो आपके पोस्ट को संकेत करता है कि आपका पोस्ट किस मुख्य शब्द पर लिखा गया है। अर्थात आपको पोस्ट में वह शब्द चुनना होगा जो , आपके पोस्ट का पुरजोर वकालत करता हो।

जैसे सैमसंग मोबाइल पर कोई व्यक्ति पोस्ट लिख रहा है तो सैमसंग का अनेको अनेक मॉडल बाजार में उपलब्ध है। किसी एक मॉडल पर वह जो पोस्ट तैयार है समझिए सैमसंग का मॉडल SD-68795 है , तो आपका फोकस कीवर्ड भीSD-68795 ही होगा। ताकि कोई भी व्यक्ति इस मॉडल को सर्च करें तो गूगल डायरेक्ट आपके पोस्ट तक उस व्यक्ति को पहुंचा दें।

 

६ पर्मालिंक ( PERMALINK )

पोस्ट में यू.आर.एल ( आपके पोस्ट का पता ) बनाने के काम आता है। आप परमालिक में जिसकी वर्ल्ड को दर्शाएंगे वह आपके यू.आर.एल URL में तब्दील हो जाएगा।

अतः पर्मालिंक में छोटे और साफ-सुथरे तरीके से शब्दों का चयन करके लिखें। यह भविष्य में आपके पोस्ट का पता होगा , जिसपर गूगल पाठकों को भेजेगा। अतः आप आपने पोस्ट का पता स्पष्ट रूप से लिखें जिसमे पोस्ट से संबंधित शब्द भी आवश्यक रूप से होने चाहिए।

 

७ मेटा डिस्क्रिप्शन ( META DESCRIPTIOM )

मेटा डिस्क्रिप्शन आपके पोस्ट का संक्षिप्त सार होता है जो लोगों को आपके पूरे पोस्ट को पढ़ने के लिए मजबूर करता है। समझने वाली बात यह है कि जब आप गूगल पर किसी टेक्नोलॉजी कुछ सर्च करते हैं।

मान लीजिए  ड्रोन शब्द को आप गूगल पर सर्च करते हैं , तो वहां पर गूगल आपको रिजल्ट में किसी व्यक्ति विशेष का पोस्ट दिखाता है। उसके नीचे उसकी वेबसाइट का एड्रेस होता है , और उसके नीचे कुछ चार पांच लाइन का शब्द लिखा होता है जिसमें ड्रोन से संबंधित शब्द लिखे होते हैं। यह वही मेटा डिस्क्रिप्शनशब्द के होते हैं जो आकर्षक रूप से लिखे गए होते हैं। ताकि दर्शक उसको संक्षेप में पढ़कर समझ सके कि जो शब्द वह या जो वह  ढूंढ रहा है। उसका सारा उत्तर इस पोस्ट के अंदर समाहित है।

मेटा डिस्क्रिप्शन आपके पोस्ट के महत्व को और बढ़ाता है। यदि आपका मेटा डिस्क्रिप्शन और अन्य लोगों से ठीक है और आपकी साइट/पोस्ट  पांचवें – छठे नंबर पर भी है तो वह कोई भी व्यक्ति जो लोग इसके  बारे में जानना चाहता है। वह आपका डिस्क्रिप्शन देख कर आपकी वेबसाइट पर जाएगा। एक तरीके से मेटा डिस्क्रिप्शन आपके पोस्ट का विज्ञापन ही होता है।

 

ऑफ पेज एस.इ.यू ( OFF PAGE SEO )

ऑन पेज में SEO आपके वेबसाइट पेज पर किए गए सभी कार्य सेटिंग लेख आदि है। ऑफ पेज SEO का कार्य मुख रूप से विज्ञापन से जुड़ा है।

मानिये आपकी वेबसाइट एक दुकान के समान है। अब दुकान लग चुकी है , और लोगों को जानकारी देनी है , कि हमारा एक दुकान है। हमारे उस दुकान टेक्नोलॉजी , मोबाइल , वस्त्र परिधान , खाने – पीने का सामान , गाड़ी अथवा वह कोई भी एक लाइन जो आपने वेबसाइट के लिए चुना है।  उसकी सभी जानकारी सभी सामग्री हमारी वेबसाइट रूपी दुकान पर उपलब्ध है।

विज्ञापन जितना ज्यादा और आकर्षक तरीके से होगा व्यक्ति उतने ही आकर्षक तरीके से आपके वेबसाइट पर आने के लिए मजबूर होंगे। क्योंकि आज इंटरनेट हर एक व्यक्ति के हाथ में आ चुका है , और वह इंटरनेट का प्रयोग करता है। हर एक व्यक्ति आज अपने ईमेल आईडी से जुड़ा है फेसबुक , व्हाट्सएप , इंस्टाग्राम ,ईमेल  आदि अनेक सोशल मीडिया को चलाता है। इस माध्यम को अपनाकर आप जुड़कर अपना अकाउंट बनाकर उन सभी लोगों को वहां जोड़ सकते हैं , और अपने इस वेबसाइट / दुकान का प्रचार – प्रसार कर सकते हैं।

आज आपने देखा होगा कि फेसबुक पर या व्हाट्सएप , इंस्टाग्राम पर ऐसे ग्रुप होते हैं , जिसमें हजारों – लाखों लोग जुड़े हुए होते हैं। उन ग्रुपों में जो उस ग्रुप का एडमिन होता है , संचालक होता है। वह धीरे से अपना कोई भी विज्ञापन उस ग्रुप में कर देता है। संभावना यही रहती है कि उस लाखों लोग में से कुछ हजार लोग आपके वेबसाइट पर जाते ही जाते हैं।

तो ऑफ पेज SEO में इस प्रकार का चीज आपको करना पड़ेगा। आपके पोस्ट की सफलता आपके पोस्ट के विज्ञापन पर निर्भर  है।

 

१ सोशल मीडिया से SEO का प्रयोग – ( SOCIAL MEDIA )

आज के समय में चाहे राजनीति हो अथवा सामान्य जीवन , प्रचार का माध्यम सोशल मीडिया बन गया है। आज एक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े हुए हैं। किसी भी संगठन से जुड़े सभी लोग सोशल मीडिया से जुड़ गए हैं। ऐसे में आज हर एक व्यक्ति की भूमिका सोशल मीडिया में हो गई है।

आप फेसबुक,  इंस्टाग्राम , व्हाट्सएप आदि जगहों पर अपना अकाउंट ID  बनाकर लोगों को अधिक से अधिक संख्या में जोड़ सकते हैं , और अपने वेबसाइट का विज्ञापन कर सकते हैं।

आपके वेबसाइट के प्रचार – प्रसार के लिए कुछ वेबसाइटें पैसा लेती हैं और दावा करती हैं कि आप इतना पैसा दीजिए हम निश्चित रूप से इतने लोगों तक आपके पोस्ट को पहुंचा देंगे। किंतु इंडिया में यह सफल नहीं है , पैसा देकर विज्ञापन करवाना फिलहाल ठीक नहीं रहेगा।

उदाहरण के लिए आप फेसबुक भी देख सकते हैं जब आप ग्रुप बनाकर अधिक से अधिक लोगों को जोड़ेंगे और किसी भी प्रकार का विज्ञापन करेंगे तो फेसबुक फेसबुक आपसे उस पोस्ट को ढेर सारे लोगों तक पहुंचाने के लिए कुछ पैसे की डिमांड करता है , तो आप वैसे भी रास्ता चुन सकते हैं।  किंतु अभी जल्दबाजी होगी। आप बिना पैसा दिए सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जोड़ कर अपना विज्ञापन कर सकते हैं फ्री में ।

 

२ बैक लिंक ( BACK LINK )

आपके पोस्ट के लिए बैंक लिंक बेहद ही आवश्यक है। गूगल द्वारा तय किए गए मानदंडों में बैक लिंक का अधिक महत्व है।

बैक लिंक वह होता है जो किसी दूसरे की वेबसाइट से आपके वेबसाइट का पता मिलता है। बैक लिंक दो प्रकार के होते हैं जो DO FLOW डु फॉलो बैक लिंक , NO FLOW नो फॉलो बैक लिंक।

बैक लिंक आपके पोस्ट आपकी वेबसाइट के महत्व और उसके विश्वास का दावा करते हैं , जितने ज्यादा विश्वसनीय वेबसाइट से आपको इस प्रकार की लिंक प्राप्त होती है , उतना ही आपके पोस्ट और वेबसाइट की वैल्यू/महत्व बढ़ती है।

तो कोशिश करें बड़े से बड़े वेबसाइट से अपने वेबसाइट का लिंक प्राप्त करें,  बैक लिंक बनाते समय एक चीज का ध्यान हमेशा रखें कि आप उन वेबसाइटों से ही बैकलिंक प्राप्त करें जो विश्वसनीय और सामाजिक हो। अन्यथा  असामाजिक , अश्लील वेबसाइटों से लिंक प्राप्त करना आपकी वेबसाइट के लिए बेहद खतरनाक होता है।

 

डु फॉलो बैक लिंक ( DO FOLLOW BACK LINK )

डु फॉलो लिंक वह होता है जो आपकी वेबसाइट का नाम , यू.आर.एल कोई भी वेबसाइट अपने पोस्ट में देता है। जिसके माध्यम से कोई भी पाठक आज की वेबसाइट पर डायरेक्ट जा सकता है। आपने कोई पोस्ट पढ़ते हुए यह देखा होगा कि उस पोस्ट में नीले कलर की एक लिंक बनी होती है ,जो किसी और वेबसाइट अथवा पोस्ट पर आपको पहुंचा देती है। यह लिंक डू फॉलो बैक लिंक कहलाता है।इसकी अहमियत बेहद ख़ास है यह आपके पोस्ट को औरों से खास बनता है ।

 

नो फॉलो बैक लिंक ( NO FOLLOW BACK LINK )

नो फॉलो बैक लिंक वह बैक लिंक होती है जो कमेंट द्वारा प्राप्त किया जाता है । किंतु वह सर्च इंजन के हिसाब से यू.आर.एल नहीं बनता जिसके माध्यम से कोई भी crawler आपकी वेबसाइट पर डायरेक्ट चला जाए। इस प्रकार का लिंक नो फॉलो बैक लिंक कहते  है।

नो फॉलो बैक लिंक से अधिक महत्व डू फॉलो बैक लिंक का होता है। तो आप कोशिश करें आप अधिक से अधिक डू फॉलो बैक लिंक बना सके।

बैकलिंक बनाने के लिए कई ऐसी वेबसाइटें कार्य कर रही है , जो आपसे हर एक बैकलिंक के लिए कुछ पैसे की डिमांड करती है। तो आप उन वेबसाइटों से भी बैकलिंक प्राप्त कर सकते हैं। किंतु अधिक पैसा खर्च नहीं करना चाहते हैं तो आप किसी बड़े वेबसाइट पर Guest post लिख सकते हैं। या किसी बड़े वेबसाइट के लिए कोई पोस्ट लिखकर उन्हें दे सकते हैं और उनसे डु फॉलो बैक लिंक प्राप्त कर सकते हैं।

किंतु यह इतना आसान नहीं होता है , इसके लिए उस वेबसाइट के मालिक को संपर्क करना पड़ता है , ताकि वह आपको डु फॉलो बैक लिंक दे।  क्योंकि आज डु फॉलो लिंक  की अहमियत काफी बढ़ गई है , इसलिए आज सभी लोग डू फॉलो बैक लिंक लिए पैसों की चाहत रखते हैं।

 

वेबमास्टर ( WEBMASTER )

वेबमास्टर आपके पोस्ट , आपकी वेबसाइट को इंटरनेट के दुनिया में जोड़ने का माध्यम है।  आप अपने पोस्ट और वेबसाइट को सर्वप्रथम वेबमास्टर में दर्ज करिए , उसके बाद आप ऑटोमेटिक जितने भी पोस्ट लिखेंगे वह एक के बाद एक निरंतर कुछ समय के अंतराल में इंटरनेट की दुनिया में जुड़ता जाएगा और लोगों तक पहुंचता रहेगा।

वेबमास्टर आपके पोस्ट को सर्च इंजन से जोड़ता है , जिस पर लोग अपने प्रश्न का हल ढूंढने के लिए आते हैं।

 

निष्कर्ष –

समग्रतः  कह सकते हैं कि आपकी वेबसाइट आपके आमदनी का एक स्रोत बन सकती है , और जल्दी से जल्दी आपको आपके मेहनत का मूल्य मिल सकता है।

इसके लिए आपको गूगल द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन संयमित वह नियमित रूप से करना आवश्यक है। आप SEO का ठीक प्रकार से उपयोग करके तुरंत व यथाशीघ्र अपने पोस्ट को रैंक करवा सकते हैं। किंतु आपका संयम रखना अति आवश्यक है। आप अपने पोस्ट को नियमित जांच करते रहे और उसमें रही खामियों को त्रुटियों को दूर करते रहे। निश्चित ही आपका पोस्ट ढेर सारे लोगों तक पहुंचेगा और आपको आपके मेहनत का मूल्य मिल सकेगा।

कुछ लोग पैसा कमाने की जल्दी कर देते हैं और संयम खो देते हैं , ऐसा कदापि न करें। समय लगेगा किंतु आपको निराशा हाथ नहीं लगेगी। इसके लिए आपको नियमित रूप से और संयमित होकर कार्य करने की आवश्यकता है।

 

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